यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 66 of 124
अपि तुच्छलोकंरजन-मासंजनमत्र-विड्भाण्डे।
प्रिय! वृन्दावनजीवन जनसंगं स्वार्थ भंजनं मुंज॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.89)
अपि तुचलोकानाराजन-मसंजनमात्र-विद्भांडे। प्रिय! वृन्दावन जीवन लोक समागम स्वार्थ विनाश मुंज.. - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.89)