यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 71 of 124
श्रीमद्ध वृन्दाटवी कुंजपुंजे नित्यविहारिणौ। गौरश्याम महाश्चर्यकिशोरौ मम जीवनौ॥ 5.48॥
- श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.48)
श्रीमद्धा वृंदातवि कुंजपुंजे नित्यविहारिनौ। गौरश्याम महाचार्य किशोरु मम जीवनौ।।5.48।।- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.48)