यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 73 of 124
मा कुरुकर्म न योगं न विष्णुभजनं न वा श्रवणम्।
ध्रुवमवाप्स्यसि परपदं वृन्दारण्ये यथा तथा तिष्ठन्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.09)
कोई कुरुक्रम नहीं, कोई योग नहीं, कोई विष्णु भजन नहीं, कोई श्रवणम नहीं। ध्रुववाप्स्यसि परपदं वृन्दारण्ये यथा तथा तिष्ठ.. - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.09)