यदैव सच्चिद्रसरूप

Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती

Verse 96 of 124

हरिभक्ति सुरस सिन्धो मन्थदिव मन्थादिव सारमुत्थतं किमपि। आश्रय परमोदारं सकलासारं विहाय राधिकारामम्॥ - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.35) हरिभक्ति सुरस सिन्धो मन्थादिव मन्थादिव सरमुत्थत्न किमापि। आश्रयाय परमोधारणं सकलासरनं विहाय राधाक्रमम्.. - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.35)
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