रसिक अनन्य उपासिका भाव भरे रस ऐंन
Vrindavipun Vilasa — श्री किशोर दास
Verse 1 of 8
ऐसो श्री वृंदाविपुन, परम प्रेम रस रूप।
रसिक उपासक संत जन, विचरत परम अनूप॥
- श्री किशोर दास, श्री वृंदाविपुन विलास (8)
ऐसी हैं श्री वृंदावी पुन, परम प्रेम की प्रतिमूर्ति। रसिक उपासक संत जन, विचारत परम अनुप.. - श्री किशोर दास, श्री वृन्दाविपुण विलास (8)