जयत्यशेषाद्भुतमाधुरी सा
Vrishabhanupur Shataka —
Verse 2 of 6
जयत्यशेषाद्भुतमाधुरी सा, पुरी वृषाट्टस्करराजकस्य।
यन्नाम श्रृण्वन्ननुनंदसूनु वृजत्यवस्थां जड़िमाभिधानाम्॥
- वृषभानुपुर शतक (1), श्री वंशी अली द्वारा रचित
जयत्यशेषद्भूतमाधुरी स, पुरी वृषात्सकरराजकस्य। यन्नं श्रीवन्नुन्नदासुनु व्रजत्यवस्तां जदिमाभिधानम्। - वृषभानुपुर शतक (1), श्री वंशी अली द्वारा लिखित