बसौ मेरे नैननि में दोउ चंद
Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य
Verse 4 of 29
(राग रामकली - एकताल एवं राग विहाग)
बसौ मेरे नैननि में दोउ चंद। [1]
गोर बदनि बृषभानु नंदिनी, स्यामबरन नँदनंद॥ [2]
गोलक रहे लुभाय रूप में निरखत आनंदकंद। [3]
जय श्रीभट्ट प्रेमरस बंधन, क्यों छूटै दृढ़ फंद॥ [4]
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (53)
(राग रामकली - एकताल एवन राग विहागा) बसौ मेरे नैनी में दू छंदा। [1] सुन्दर देह बृषभानु नन्दिनी, स्याम्बरन नन्दनन्द। [2] आनन्दकन्द ने गोलक का मनोहर रूप लिखा। [3] जय श्री भट्ट प्रेमरस बंधन, क्यों छोड़ा मजबूत बंधन.. [4] - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (53)