चित्त में श्री यमुना, निशिदिन जु राखो

चतुर्भुजदास

Pada 18

चित्त में श्री यमुना, निशिदिन जु राखो । भक्त के वश कृपा करत हें सर्वदा ऐसो श्री यमुना जी को हे जु साखो ॥१॥ जा मुख ते श्री यमुने यह नाम आवे, संग कीजे अब जाय ताको । चतुर्भुज दास अब कहत हैं सबन सों, तातें श्री यमुने यमुने जु भाखो ॥२॥
प्राणपति विहरत श्री यमुना कूलेमहामहोत्सव श्री गोकुल गाम