मैया मोहि माखन मिसरी भावे

चतुर्भुजदास

Pada 4

मैया मोहि माखन मिसरी भावे । मीठो दधि मिठाई मधुघृत, अपने कर सों क्यों न खवावे ॥१॥ कनक दोहनी दे कर मेरे, गो दोहन क्यों न सिखावे । ओट्यो दूध धेनु धोरी को, भर के कटोरा क्यों न पिवावे ॥२॥ अजहु ब्याह करत नही मेरो, तोहे नींद क्यों आवे । ‘चतुर्भुज’ प्रभु गिरिधर की बतियाँ, सुन ले उछंग पय पान करावें ॥३॥
जसोदा!कहा कहौं हौं बातमंगल आरती गोपाल की