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चतुर्भुजदास
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मंगल आरती गोपाल की
मंगल आरती गोपाल की
चतुर्भुजदास
Pada 5
मंगल आरती गोपाल की । नित प्रति मंगल होत निरख मुख, चितवन नयन विशाल की ॥ मंगल रूप श्याम सुंदर को, मंगल छवि भृकुटि सुभाल की । चतुर्भुज प्रभु सदा मंगल निधि, बानिक गिरिधर लाल की ॥
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गोवर्धन गिरिसघनकंदरा →