गोवर्धन की सिखर चारु पर
छीतस्वामी
Pada 7
गोवर्धन की सिखर चारु पर फूली नव मधुरी जाय।
मुकुलित फलदल सघन मंजरी सुमन सुसोभित बहुत भाय॥१॥
कुसुमित कुंज पुंज द्रुम बेली निर्झर झरत अनेक ठांय।
छीतस्वामी ब्रजयुवतीयूथ में विहरत हैं गोकुल के राय॥२॥
छीतस्वामी
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