प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी

कृष्णदास

Pada 6

प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी॥ उर सोहे मरगजी सुमाल डगमगी सुदेशचाल चरणकंज मगनजीति करत गामिनी ॥१॥ प्रिया प्रेम अंगराग सगमगी सुरंग पाग, गलित बरूहातुलचूड अलकनसनी ॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधर सुरत कंठ पत्र लिख्यो करज लेखनी पुन-पुन राधिका गुनी ॥२॥
कंचन मनि मरकत रस ओपीगोकुल गाम सुहावनो सब मिलि खेलें फाग