कृष्णदास
Ashtachhap
22 padas · Source: Kavita Kosh
- 1. बैद को बैद गुनी को गुनी
- 2. मो मन गिरिधर छबि पै अटक्यो
- 3. देख जिऊँ माई नयन रँगीलो
- 4. तरनि तनया तट आवत है
- 5. कंचन मनि मरकत रस ओपी
- 6. प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी
- 7. गोकुल गाम सुहावनो सब मिलि खेलें फाग
- 8. सघन कुंज भवन आज फूलन की मंडली रचि
- 9. नंद घरुनि वृषभान घरुनि मिलि
- 10. रंगीली तीज गनगौर आज चलो भामिनी
- 11. नवल निकुंज महेल मंदिर में
- 12. कहत जसोदा सब सखियन सों
- 13. लाल गोपाल गुलाल हमारी आँखिन में जिन डारो जू
- 14. खेलत वसंत निस पिय संग जागी
- 15. आज कछु देखियत ओर ही बानक
- 16. तरणि तनया तीर आवत हें प्रात समे
- 17. लीला लाल गोवर्धनधर की
- 18. परम कृपाल श्री वल्लभ नंदन
- 19. फल्यो जन भाग्य
- 20. नवल वसंत नवल वृंदावन
- 21. श्री गिरिधर लाल की बानिक ऊपर
- 22. शरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी