श्री यमुने पर तन मन धन प्राण वारो

कुम्भनदास

Pada 15

श्री यमुने पर तन मन धन प्राण वारो । जाकी कीर्ति विशद कौन अब कहि सकै, ताहि नैनन तें न नेक टारों ॥१॥ चरण कमल इनके जु चिन्तत रहों, निशदिनां नाम मुख तें उचारो । कुम्भनदास कहे लाल गिरिधरन मुख इनकी कृपा भई तब निहारो ॥२॥
भक्त इच्छा पूरन श्री यमुने जु करताश्री यमुने अगनित गुन गिने न जाई