कुम्भनदास
Ashtachhap
17 padas · Source: Kavita Kosh
- 1. भक्तन को कहा सीकरी सों काम
- 2. कितै दिन ह्वै जु गए बिनु देखे
- 3. माई हौं गिरधरन के गुन गाऊँ
- 4. कहा करौं वह मूरति जिय ते न टरई
- 5. सीतल सदन में सीतल भोजन भयौ
- 6. बैठे लाल फूलन के चौवारे
- 7. तुम नीके दुहि जानत गैया
- 8. संतन को कहा सीकरी सों काम
- 9. रसिकिनि रस में रहत गड़ी
- 10. साँझ के साँचे बोल तिहारे
- 11. आई ऋतु चहूँदिस फूले द्रुम
- 12. हमारो दान देहो गुजरेटी
- 13. गाय सब गोवर्धन तें आईं
- 14. भक्त इच्छा पूरन श्री यमुने जु करता
- 15. श्री यमुने पर तन मन धन प्राण वारो
- 16. श्री यमुने अगनित गुन गिने न जाई
- 17. श्री यमुने रस खान को शीश नांऊ