श्री यमुने रस खान को शीश नांऊ

कुम्भनदास

Pada 17

श्री यमुने रस खान को शीश नांऊ। ऐसी महिमा जानि भक्त को सुख दान, जोइ मांगो सोइ जु पाऊं ॥१॥ पतित पावन करन नामलीने तरन, दृढ कर गहि चरन कहूं न जाऊं । कुम्भन दास लाल गिरिधरन मुख निरखत यहि चाहत नहिं पलक लाऊं ॥२॥
श्री यमुने अगनित गुन गिने न जाई