नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई

नंददास

Pada 14

नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई । भक्त के चित्त की वृत्ति सब जानके, तहांते अतिहि आतुर जु धाई ॥१॥ जाके मन जैसी इच्छा हती ताहिकी, तैसी ही आय साधजु पुजाई । नंददास प्रभु तापर रीझि रहे जोई श्री यमुनाजी को जस जु गाई ॥२॥
ताते श्री यमुने यमुने जु गावोभक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी