अरी चल दूल्हे देखन जाय

नंददास

Pada 16

अरी चल दूल्हे देखन जाय । सुंदर श्याम माधुरी मूरत अँखिया निरख सिराय ॥१॥ जुर आई ब्रज नार नवेली मोहन दिस मुसकाय । मोर बन्यो सिर कानन कुंडल बरबट मुख ही सुहाय ॥२॥ पहरे बसन जरकसी भूषन अंग अंग सुखकाय । केसी ये बनी बरात छबीली जगमग चुचाय ॥३॥ गोप सबा सरवर में फूले कमल परम लपटाय । नंददास गोपिन के दृग अलि लपटन को अकुलाय ॥४॥
भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसीमाई आज तो गोकुल ग्राम