रुचिर चित्रसारी सघन कुंज में मध्य कुसुम-रावटी राजै

नंददास

Pada 4

(राग विहाग) रुचिर चित्रसारी सघन कुंज में मध्य कुसुम-रावटी राजै । चंदन के रूख चहुँ ओर छवि छाय रहे, फूलन के अभूषन-बसन, फूलन सिंगार सब साजै ॥ सीयर तहखाने में त्रिविध समीर सीरी, चंदन के बाग मध चंदन-महल छाजै । नंददास प्रिया-प्रियतम नवल जोरि, बिधना रची बनाय, श्री ब्रजराज विराजै ॥
तपन लाग्यौ घाम, परत अति धूप भैयाऊधव के उपदेश सुनो ब्रज नागरी