तपन लाग्यौ घाम, परत अति धूप भैया

नंददास

Pada 3

(राग सारंग) तपन लाग्यौ घाम, परत अति धूप भैया, कहँ छाँह सीतल किन देखो । भोजन कूँ भई अबार, लागी है भूख भारी, मेरी ओर तुम पेखो ॥ बर की छैयाँ, दुपहर की बिरियाँ, गैयाँ सिमिट सब ही जहँ आवै । ’नंददास’ प्रभु कहत सखन सों, यही ठौर मेरे जीय भावै ॥
आज वृंदाविपिन कुंज अद्भुत नईरुचिर चित्रसारी सघन कुंज में मध्य कुसुम-रावटी राजै