श्री जमुना जी दीन जानि मोहिं दीजे

परमानंददास

Pada 13

श्री जमुना जी दीन जानि मोहिं दीजे। नंदकुमार सदा वर मांगों गोपिन की दासी मोहि कीजे ॥१॥ तुम तो परम उदार ख्रुपा निधे चरन सरन सुखकारी। तिहारे बस सदा लाडिली वर तट क्रीडत गिरिधारी॥२॥ सब ब्रजजन विहरत संग मिलि अद्भुत रास विलासी । तुम्हारे पुलिन निकट कुंजने द्रुम कोमल ससी सुबासी ॥३॥ ज्यों मंडल में चंद बिराजत भरि भरि छिरकत नारी । हँसत न्हात अति रस भरि क्रीडत जल क्रीडा सुखकारी ॥४॥ रानी जू के मंदिर में नित उठि पाँय लागि भवन काज सब कीजे । परमानन्ददास दासी व्है नन्दनन्दन सुख दीजे ॥५॥
यह प्रसाद हों पाऊं श्री यमुना जीनन्द बधाई दीजे हो ग्वालन