परमानंददास

Ashtachhap

35 padas · Source: Kavita Kosh

  1. 1. बृंदावन क्यों न भए हम मोर
  2. 2. कौन रसिक है इन बातन कौ
  3. 3. ब्रज के बिरही लोग बिचारे
  4. 4. मैया मोहिं ऐसी दुलहिन भावै
  5. 5. कहा करौ बैकुंठहि जाय
  6. 6. लाल कछु कीजे भोजन तिल तिल कारी हों वारी हों
  7. 7. पतंग की गुडी उडावन लागे व्रजबाल
  8. 8. यह मांगो गोपीजन वल्लभ
  9. 9. आज दधि मीठो मदन गोपाल
  10. 10. माई मीठे हरि जू के बोलना
  11. 11. मंगल माधो नाम उचार
  12. 12. यह प्रसाद हों पाऊं श्री यमुना जी
  13. 13. श्री जमुना जी दीन जानि मोहिं दीजे
  14. 14. नन्द बधाई दीजे हो ग्वालन
  15. 15. चैत्र मास संवत्सर
  16. 16. प्रथम गोचारण चले कन्हाई
  17. 17. कापर ढोटा नयन नचावत
  18. 18. आज दधि कंचन मोल भई
  19. 19. रंचक चाखन देरी दह्यो
  20. 20. यह धन धर्म ही तें पायो
  21. 21. पद्म धर्यो जन ताप निवारण
  22. 22. आज बधाई को दिन नीको
  23. 23. रक्षा बंधन को दिन आयो
  24. 24. राखी बांधत जसोदा मैया
  25. 25. जागो मेरे लाल जगत उजियारे
  26. 26. गोपी प्रेम की ध्वजा
  27. 27. तिहारे चरन कमल को माहत्म्य
  28. 28. डोल माई झूलत हैं ब्रजनाथ
  29. 29. श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिके
  30. 30. श्री यमुने पिय को बस तुमजु कीने
  31. 31. श्री यमुने के साथ अब फ़िरत है नाथ
  32. 32. श्री यमुने की आस अब करत है दास
  33. 33. आज ललन की होत सगाई
  34. 34. कुंज भवन में मंगलचार
  35. 35. गावत गोपी मधु मृदु बानी