ब्रज के बिरही लोग बिचारे
परमानंददास
Pada 3
ब्रज के बिरही लोग बिचारे।
बिन गोपाल ठगे से ठाढे अति दुरबल तन हारे॥
मात जसोदा पंथ निहारत निरखत साँझ सकारे।
जो कोइ कान्ह-काह कहि बोलत ऍंखियन बहत पनारे॥
यह मथुरा काजर की रेखा जे निकसे ते कारे।
'परमानंद' स्वामि बिनु ऐसे ज्यों चंदा बिनु तारे॥