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परमानंददास
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कहा करौ बैकुंठहि जाय
कहा करौ बैकुंठहि जाय
परमानंददास
Pada 5
कहा करौ बैकुंठहि जाय? जहाँ नहि नन्द जसोदा गोपी, जहाँ नहीं ग्वाल-बाल और गाय। जहाँ न जल जमुना कौ निर्मल, और नहीं कदमनि की हाय। 'परमानन्द' प्रभुचतुर ग्वालिनी, बज-रज तजि मेरी जाइ बलाय।।
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