कौन चतुर जुवती प्रिया, जाहि मिलन लाल चोर है रैंन
Hit Chaurasi — Hit Harivansh
Pada 6
कौन चतुर जुवती प्रिया, जाहि मिलन लाल चोर है रैंन ।
दुरवत क्योंअब दूरै सुनि प्यारे, रंग में गहले चैन में नैन ॥
उर नख चंद विराने पट, अटपटाे से बैन ।
(जै श्री) हित हरिवंश रसिक राधापति प्रमथीत मैंन ॥6॥
kauna catura juvatī priyā, jāhi milana lāla cora hai raiṃna ।
duravata kyoṃaba dūrai suni pyāre, raṃga meṃ gahale caina meṃ naina ॥
ura nakha caṃda virāne paṭa, aṭapaṭāe se baina ।
(jai śrī) hita harivaṃśa rasika rādhāpati pramathīta maiṃna ॥6॥