हित चौरासी
Hit Chaurasi — Hit Harivansh
Radhavallabh sampradaya · 84 padas · Source: hindipath.com / radhekrishnaworld.com
- 1. जोई जोई प्यारो करे सोई मोहि भावे, भावे मोहि जोई सोई सोई करे
- 2. प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी भेंटि नवीन मेघ सौं दामिन
- 3. प्रात समै दोऊ रस लंपट, सुरत जुद्ध जय जुत अति फूल
- 4. आजु तौ जुवती तेरौ वदन आनंद भरयौ, पिय के संगम के सूचत सुख चैन
- 5. आजु प्रभात लता मंदिर में, सुख वरषत अति हरषि जुगल वर
- 6. कौन चतुर जुवती प्रिया, जाहि मिलन लाल चोर है रैंन
- 7. आजु निकुंज मंजु में खेलत, नवल किसोर नवीन किसोरी
- 8. अति ही अरुन तेरे नयन नलिन री
- 9. बनी श्रीराधा मोहन की जोरी
- 10. आजु नागरी किसोर, भाँवती विचित्र जोर,
- 11. मंजुल कल कुंज देस, राधा हरि विसद वेस, राका नभ कुमुद – बंधु,
- 12. चलहि राधिके सुजान, तेरे हित सुख निधान ; रास रच्यौ स्याम तट क
- 13. नंद के लाल हरयौं मन मोर
- 14. अधर अरुन तेरे कैसे कैं दुराऊँ ?
- 15. अपनी बात मोसौं कहि री भामिनी,औंगी मौंगी रहति गरब की माती
- 16. आज मेरे कहे चलौ मृगनैंनी
- 17. आज मेरे कहैं चलौ मृगनैंनी
- 18. सुनि मेरो वचन छबीली राधा
- 19. खेलत रास रसिक ब्रजमंडन
- 20. मोहनलाल के रस माती
- 21. तेरे नैंन करत दोउ चारी
- 22. नैंननिं पर वारौं कोटिक खंजन
- 23. राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
- 24. आजु गोपाल रास रस खेलत, पुलिन कलपतरु तीर री सजनी
- 25. आजू निकी बनी श्री राधिका नागरी
- 26. मोहनी मदन गोपाल की बाँसुरी
- 27. मधुरितु वृन्दावन आनन्द न थोर
- 28. राधे देखि वन की बात
- 29. ब्रज नव तरुनी कदंब मुकुट मनि स्यामा आजु बनी
- 30. देखत नव निकुंज सुनु सजनी लागत है अति चारु
- 31. आजु अति राजत दम्पति भोर
- 32. आजु बन क्रीडत स्यामा स्याम
- 33. आजु बन राजत जुगल किसोर
- 34. बन की कुंजनि कुंजनि डोलनि
- 35. झूलत दोऊ नवल किसोर
- 36. आजु बन नीकौ रास बनायौ
- 37. चलहि किन मानिनि कुंज कुटीर
- 38. चलहि उठि गहरु करति कत, निकुंज बुलावत लाल
- 39. खेल्यो लाल चाहत रवन
- 40. बैठे लाल निकुंज भवन
- 41. प्रीति की रीति रंगिलोइ जानै
- 42. प्रीति न काहु की कानि बिचारै
- 43. अति नागरि वृषभानु किसोरी
- 44. चलि सुंदरि बोली वृंदावन
- 45. आवति श्रीवृषभानु दुलारी
- 46. विपिन घन कुंज रति केलि भुज मेलि रूचि,
- 47. वन की लीला लालहिं भावै
- 48. बनी वृषभानु नंदिनी आजु
- 49. देखि सखी राधा पिय केलि
- 50. नवल नागरि नवल नागर किसोर मिलि, कुञ्ज कौंमल कमल दलनि सिज्या र
- 51. दान दै री नवल किसोरी
- 52. देखौ माई सुंदरता की सीवाँ
- 53. देखौ माई अबला के बल रासि
- 54. नयौ नेह नव रंग नयौ रस, नवल स्याम वृषभानु किसोरी
- 55. आजु दोउ दामिनि मिलि बहसीं
- 56. हौं बलि जाऊँ नागरी स्याम
- 57. प्रथम जथामति प्रनऊँ (श्री) वृंदावन अति रम्य
- 58. तेरे हित लैंन आई, बन ते स्याम पठाई: हरति कामिनि घन कदन काम क
- 59. यह जु एक मन बहुत ठौर करि, कहु कौनें सचु पायौ
- 60. कहा कहौं इन नैननि की बात
- 61. आजु सखी बन में जु बने प्रंभु नाचते हैं ब्रज मंडन
- 62. खेलत रास दुलहिनी दूलहु
- 63. मोहन मदन त्रिभंगी
- 64. बैंनु माई बाजै बंसीवट
- 65. मूल-मदन मदन धन निकुंज खेलत हरि, राका रुचिर सरद रजनी
- 66. विहरत दोऊ प्रीतम कुंज
- 67. रुचिर राजत वधू कानन किसोरी
- 68. रास में रसिक मोहन बने भामिनी
- 69. मोहिनी मोहन रंगे प्रेम सुरंग,
- 70. आजु सँभारत नाँहिन गोरी
- 71. स्याम सँग राधिका रास मंडल बनी
- 72. सुंदर पुलिन सुभग सुख दाइक
- 73. खंजन मीन मृगज मद मेंटत, कहा कहौं नैननिं की बातैं
- 74. काहे कौं मान बढ़ावतु है बालक मृग लोचनि
- 75. हौं जु कहति इक बात सखी, सुनि काहे कौं डारत?
- 76. नागरीं निकुंज ऐंन किसलय दल रचित सैंन,
- 77. लटकति फिरति जुवति रस फूली
- 78. सुधंग नाचत नवल किसोरी
- 79. रहसि रहसि मोहन पिय के संग री, लड़ैती अति रस लटकति
- 80. वल्लवी सु कनक वल्लरी तमाल स्याम संग,
- 81. वृषभानु नंदिनी मधुर कल गावै
- 82. नागरता की राशि किसोरी
- 83. छाँड़िदैं मानिनी मान मन धरिबौ
- 84. आजुब देखियत है हो प्यारी रंग भरी