गोदोहन

वृंदावन लीला · 1 padas

मैं दुहिहौं मोहिं दुहन सिखावहु । कैसें गहत दोहनी घुटुवनि, कैसैं बछरा थन लै लावहु । कैसैं लै नोई पग बाँधत, कैसे लै गैया अटकावहु । कैसैं धार दूध की बाजति, सोई सोइ विधि तुम मोहिं बतावहु । निपट भई अब साँझ कन्हैया, गैयनि पै कहुँ चोट लगावहु । सूर श्याम सौं कहत ग्वाल सब,धेनु दुहन प्रातहि उठि आवहु ॥2॥

Pada 1

वृंदावन प्रस्थानगो-चारण