दोहावली

दोहावली

भाग-3 दोहा संख्या 101 से 150 तक

दोहा संख्या 111 से 120 तुलसी रामहु तें अधिक राम भगत जियँ जान। रिनिया राजा राम भे धनिक भए हनुमान।111।
111
कियो सुसेवक धरम कपि कृतग्य जियँ जानि । जोरि हाथ ठाढ़े भए बरदायक बरदानि।112।
112
भगत हेतु भगवान प्रभु रा धरेउ तनु भूप। किये चरित पावन परम प्राकृत नर अनुरूप।113।
113
ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार। सोइ सच्चिदानंदघन कर नर चरित उदार।114।
114
हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान। जेहिं मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।115।
115
सुद्ध सच्चिदानंदमय कंद भानुकुल केतु। चरित करत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु।116।
116
बाल बिभूषन बसन बर धूरि धूसरित अंग। बालकेति रघुबर करत बाल बंधु सब संग।117।
117
अनुदित अवध बधावने नित नव मंगल मोद। मुदित मातु पितु लोग लखि रघुबर बाल बिनोद।118।
118
राज अजिर राजत रूचिर कोसलपालक बाल। जानु पानि चर चरित बर सगुन सुमंगल माल।119।
119
नाम ललित लीला ललित ललित रूप रघुनाथ। ललित बसन भूषन ललित ललित अनुज सिसु साथ।120।
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