दोहावली

दोहावली

भाग-3 दोहा संख्या 101 से 150 तक

दोहा संख्या 121 से 130 श्री राम भरत लछिमन ललित सत्रु समन सुभ नाम। सुमिरत दसरथ सुवन सब पूजहिं सब मन काम।121।
121
बालक कोसलपाल के सेवकपाल कृपाल। तुलसी मन मानस बसत मंगल मंजु मराल।122।
122
भगत भूमि भूसुर सुरभि सुर हित लागि कृपाल। करत चरित धरि मनुज तनु सुनत मिटहिं जगजाल।123।
123
निज इच्छा प्रभु अवतरइ सुर महि गो द्विज लागि। सगुन उपासक संग तहँ रहहिं मोच्छ सब त्यागि।124।
124
परमानंद कृपायतनम न परिपूरन काम। प्रेम भगति अनपायनी देहु हमहि श्री राम।125।
125
बारि मथें घृत होइ बरू सिकता ते बरू तेल। बिनु हरि भजन न भव तरिअ यह सिद्धांत अपेल।126।
126
हरि माया कृत देाष गुन बिनु हरि भजन न जाहिं । भजिअ राम सब काम तजि अस बिचारि मन माहिं।127।
127
जो चेतन कहँ जड़ करइ जड़हि करइ चैतन्य। अस समर्थ रघुनायकहि भजहिं जीव ते धन्य।128।
128
श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान। ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।129।
129
लव निमेष परमानु जुग बरस कलप सर चंड। भजसि न मम तेहि राम कहँ कालु जासु कोदंड।130।
130
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