दोहावली

दोहावली

भाग-5 दोहा संख्या 201 से 250 तक

दोहा संख्या 221 से 230 जीवन मरन सुनाम जैसें दसरथ राय को। जियत खिलाए राम राम बिरहँ तनु परिहरेउ।221।
221
श्री प्रभुहिं बिलोकत गोद गत सिय हिय घायल नीचु। तुलसी पाई गीधपति मुकुति मनोहर मीचु।222।
222
बिरत करम रत भगत मुनि सिद्ध ऊँच अरू नीचु। तुलसी सकल सिहात सुनि गीधराज की मीचु।223।
223
मुए मरत मरिहैं सकल घरी पहरके बीचु। लही न काहूँ आजु लौं गीधराज की मीचु।224।
224
मुएँ मुकुत जीवत मुकुत मुकुत मुकुत हुँ बीचु। तुलसी सबहे तें अधिक गीधराज की मीचु।225।
225
रघुवर बिकल बिहंग सो बिलोकि दोउ बीर। सिय सुधि कहि सिय राम कहि देह तजी मति धीर।226।
226
दसरथ तें दसगुन भगति सहित तासु करि काजु। सोचत बंधु समेत प्रभु कृपासिंधु रघुराजु।227।
227
केवट निसिचर बिहग मृग किए साधु सनमानि। तुलसी रघुबर की कृपा सकल सुमंगल खानि।228।
228
मंजुल मंगल मोदमय मूरति मारूत पूत। सकल सिद्धि कर कमल तल सुमिरत रघुबर दूत।229।
229
धीर बीर रघुबीर प्रिय सुमिर समीर कुमारू। अगम सुगम सब काज करू करतल सिद्धि बिचारू।230।
230
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