दोहावली
दोहावली
भाग-5 दोहा संख्या 201 से 250 तक
दोहा संख्या 211 से 220
नाम सत्रुसूदन सुभग सुषमा सील निकेत।
सेवत सुमिरत सुलभ सुख सकल सुमंगल देत।211।
211
कौसल्या कल्यानमइ मूरति करत प्रनाम ।
सगुन सुमंगल काज सुभ कृपा करहिं सियराम।212।
212
सुमिरि सुमित्रा नाम जग जे तिय लेहिं सनेम।
सुअन लखन रिपुदवन से पावहिं पति पद प्रेम।213।
213
सीताचरन प्रनाम करि सुमिरि सुनाम सुनेम।
होहिं तीय पतिदेवता प्राननाथ प्रिय प्रेम।214।
214
तुलसी केवल कामतरू राचरित आराम।
कलितरू कपि निसिचर कहत हमहिं किये बिधि बाम।215।
215
मातु सकल सानुज भरत गुरू पुर लोग सुभाउ।
देखत देख न कैकइहि लंकापति कपिराउ।216।
216
सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल करि जान।
चलइ जोंक जल बक्रगति जद्यपि सलिलु समान।217।
217
दसरथ नाम सुकामतरू फलइ सकल कल्यान।
धरनि धाम धन धरम सुत सदगुन रूप निधान।218।
218
तुलसी जान्यो दसरथहिं न सत्य समान।
रामु तजे जेहि लागि बिनु राम परिहरे प्रान।219।
219
राम बिरहँ दसरथ मरन मुनि मन अगम सुमीचु ।
तुलसी मंगल मरन तरू सुचि सनेह जल सींचु।220।
220