कवितावली

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भाग-6 लंका काण्ड

भाग-6 लंका काण्ड प्रारंभ ( राक्षसों की चिंता ) बड़े बिकराल भालु- बानर बिसाल बड़े, ‘तुलसी’ बड़े पहार लै पयोधि तोपिहैं। प्रबल प्रचंड बरिबंड बाहुदंड खंडि । मंडि मेदिनी को मंडलीक-नीक लोपिहैं।। लंकदाहु देखें न उछाहु रह्यो काहुन को, कहैं सब सचिव पुकारि पाँव रोपिहैं ।। बाँचिहै न पाछैं तिपुरारिहू मुरारिहू के, को है रन रारिको जौं कोसलेस कोपिहैं।1।
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