चित्रकूट स्तुति

विनय पत्रिका

मुख्य

चित्रकूट स्तुति (राग बसन्त) सब सोच-बिमोचन चित्रकूट। कलिहरन, करन कल्यान बूट।1। सुचि अवनि सुहावनि आलबाल। कानन बिचित्र, बारी बिसाल।2। मंदाकिनि-मालिनि सदा सींच। बर बारि, बिषम नर-नारि नीच।3। साखा सुसृंग, भूरूह -सुपात। निरझर मधुबरद्व मृदु मलय बात।4। सुक,पिक, मधुकर, मुनिबर बिहारू। साधन प्रसून फल चारि चारू।5। भव-घोरघाम-हर सुखद छाँह। थप्यो थिर प्रभाव जानकी-नाह।6। साधक-सुपथिक बड़े भाग पाइ। पावत अनेक अभिमत अघाइ।7। रस एक, रहित-गुन-करम-काल। सिय राम लखन पालक कृपाल।8। तुलसी जो राम पद चाहिय प्रेम। सेइय गिरि करि निरूपाधि नेम।9।
1
Section 1 · 12Section 1 · 14