श्री वृंदावनरज दरसावै सोई

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 102 of 115

(राग जिला) श्री वृन्दावन वास दीजिये, अब यही हमारी आशा है। यमुना तीर सुछाय माधुरी, जहँ रसिकों का वासा है॥ [1] सेवाकुञ्ज मनोहर निधि वन, जहाँ इक रस बारो मासा है। 'ललित किशोरी' अब यह दिल बेकल, जुगल रूप रस प्यासा है॥ [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (22) (राग जिला) श्री वृन्दावन, हमें निवास दो, यही अब हमारी आशा है। यमुना तीर सुखाय मधुरि, जहँ प्रेमी वास। [1] सेवा कुंज मनोहर निधि वन, जहां है रास बारो मासा। 'ललित किशोरी' अब ये दिल बेचैन है, जुगल रूप प्यासा है.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (22)
राधा नाम को आधारश्री वृंदावनरज दरसावै सोई