श्री वृंदावनरज दरसावै सोई
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 103 of 115
(राग जिला)
श्री वृंदावनरज दरसावै सोई हितू हमारा है।
राधा मोहन छवी छकावै सोई प्रीतम प्यारा है॥ [1]
कालिंदी जल पान करावै सो उपकारी सारा है।
ललितकिशोरी जुगुल मिलावै सो अँखियों का तारा है॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२१)
(राग जिला) श्री वृन्दावनराज दरस्वै सोइ हितु हमारे। राधा मोहन छवि चकवै सोई प्रीतम प्यारी है.. [1] जल प्रदान करने में कालिंदी अति सहायक है। ललित किशोरी जुगुल मिलावै सो अँखी का तारा है.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (21)