स्वामिनि हौं पतितन शिरताज

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 113 of 115

(राग जंगला) वृन्दावनसों नेह लगैये । काम क्रोध आदिक जमदूतन मुख विदुकाय परमपद पैये॥ रटिरटि राधारमन ध्यानधरि तुरत पाप तनताप नसैये । ललितकिशोरी कुंजगलिन लुढि विगरी जन्म अनेक वनैये॥ - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२४१) (राग जंगला) वृन्दावनस नेह लाये। काम क्रोध आदिक जमदूतन मुख विदुकाय परमपद पाए... रतिरति राधारमण ध्यानधारी तेरत् पाप तंतप नासाई। ललित किशोरी कुंजगलिन लुधि विगारी जन्म अनेक वनाई.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (241)
राधा नाम को आधारराधा नाम को आधार