राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 16 of 115
कालीदह कव कूल की, ह्वैहौं त्रिविध समीर।
जुगल अंगअंग लागिहौं, उड़िहैं नूतन चीर॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (56)
कालीदह काव वंश के, वह त्रिवायु हैं। जुगल अनंगंग लगिहौं, उदाहेन नूतन चिर.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (56)