राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 2 of 115
(सवैया)
श्रीवृन्दावन वास दीजिए,आस यही वृषभानुदुलारी। [1]
वंशी वट तट नटनागर संग, करत केलि अवलौकों प्यारी॥ [2]
ललित किशोरी हूक उठत हिय, फूँकि बँसुरिया की दे मारी। [3]
दर्शन बिनु अति विकल रहत जिय, बाधा हरो श्रीराधा हमारी॥ [4]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (4)
(सवैया) मुझे श्री वृन्दावन का निवास दीजिए, ये वृषभानुदुलारी हैं। [1] वंशी वट तत् नटनागर संग, करत केलि अवलोकों प्यारी.. [2] ललित किशोरी के कंठ उठे, फनी बांसुरी धुन। [3] दर्शन बिनु अति विकल रहत जिया, हिंदी हरो श्रीराधा हमारी.. [4] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (4)