राधा नाम को आधार

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 22 of 115

ललित किशोरी लालजू, यही विनय तुम पाहिं। कूकर सूकर ह्वै रहौं, श्री वृंदावन माहिं॥ - श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (59) ललित किशोरी लालाजू, यहीं मिलती है विनम्रता। कुकर सुकर ह्वै रहौं, श्री वृन्दावन माहि.. - श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, शृंगार शतक (59)
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