जमुना-पुलिन कुंज गहबर की
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 25 of 115
(राग चैती गौरी)
जमुना-पुलिन कुंज गहबर की, कोकिल ह्वै द्रुम कूक मचाऊँ।
पद-पंकज प्रिय लाल-मधुप ह्वै, मधुरे-मधुरे गुंज सुनाऊँ॥ [1]
कूकर ह्वै बन-वीथिनि डोलौं, बचे सीथ रसिकन के खाऊँ।
'ललितकिसोरी' आस यही मम, ब्रजरज तजि छिन अनत न जाऊँ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (65)
(राग चैती गौरी) जमुना-पुलिन कुंज गहबर की, कोकिल हवाइ ढोल कुक मचाऊं। पद-पंकज प्रिय लाला-मधुप ह्वै, मधुरे-मधुरे गुंज..[1] कुकर ह्वै बाण-बिटिनी डोलौं, बच्चा बैठा रसिकां। 'ललित किशोरी' अस यही मम, ब्रजराज तजि छिन अनात न जौं.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (65)