जमुना-पुलिन कुंज गहबर की
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 26 of 115
(राग चैती गौरी)
जमुनापुलिन कुंज गहिवरकी कोकिल ह्वै द्रुम कूक मचावौं। [1]
पदपंकज प्रिय लाल मधुप ह्वै मधुरी मधुरी गुँज सुनावौं॥ [2]
कूकरि ह्वै वनवीथिन डोलौं बचे सीथ रसिकनके पावौं। [3]
ललितकिशोरी आस यहै मम व्रजरज तजि छिन अनत न जावौं॥ [4]
- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (65)
(राग चैती गौरी) जमुनापुलिन कुंज गहिवरकी कोकिल हवाइ ढोल कुक मचावौं। [1] पदपंकज प्रिया लाल मधुप है मधुरी मधुरी गुंज सनावौं..[2] अंदर एक पाक कला है, बच्चों को सत्य रसिकाना का आनंद लेने दें। [3] ललित किशोरी अस है मम व्रजराज तजि छिन अनात न जावु.. [4] - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (65)