राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 42 of 115
पशु पक्षी पाषाण हों, तृण अणु रज ब्रज गैल।
कूप बावरी कीजिए, ललित किशोरी छैल॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (91)
पशु, पक्षी, पत्थर, घास और राजा ब्रज कारागार। कूप बावरी किजी, ललित किशोरी छैल.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (91)