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Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 43 of 115
ललितकिशोरी यह विनै, जुगललाल सिरमौर।
विचरौं श्रीबन पावहूँ, व्रजवासिन के कौर॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (92)
ललित किशोरी याह विनाई, जुगलालल सिरमौर। विचारौं श्रीबाण पावहु, व्रजवासिन की कौर.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतायु (92)