राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 5 of 115
मेरी जीवनमूरि है, रज वृंदावन ऐन।
जुगललाल करुणानिधे, दरसैये इन नैन॥
- श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (11)
मेरा जीवन ही मेरा जीवन है, मेरा राज्य ही वृन्दावन है। जुगललाल करुणानिधि, नैन में दरसाई.. - श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रृंगार शतक (11)