राधा नाम सों चित रांच

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 59 of 115

(राग देस) राधा नामही सों नातो। जाके नाम लेत प्रीतम सों परत प्रीत को खातो॥ [1] जो विश्वासै ललितकिशोरी पहिले तं मन लातो। होतो कुंज निवास जगत क्यों जनम जनम भरमातो॥ [2] - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (203) (राग देसा) राधा नमः पुत्र नतो। अपने प्यारे बेटे का नाम ले और प्रेम की परत खाय.. [1] ललित किशोरी पर विश्वास करके पहले अपना हृदय लाओ। कुंज संसार में क्यों रहता है? जन्म-जन्मान्तर क्यों होते हैं? [2] - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (203)
राधा नाम सों चित रांचराधा नाम सों चित रांच