राधा नाम सों चित रांच

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 60 of 115

(राग देस) राधा नाम अदभुत चंद। वरसत नित शृंगार सुधारस सरसत अमित अनंद॥ [1] जासु प्रभा अंतसतम नासन जात सकल दुखद्वन्द। ललितकिशोरी सदायेकरस क्यों न भजसि मतिमंद॥ [2] - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (216) (राग देसा) राधा नाम अद्भुत छंद। वरसत् नीता श्रृंगार सुधारस सरसत् अमित आनंद।।[1] जसु प्रभा अंतसतम नासं जत सकल दुखद्वंद। ललित किशोरी सदायेकरस क्यूं एन भजसि मतिमंद.. [2] - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (216)
राधा नाम सों चित रांचराधा नाम सों चित रांच