श्री वृंदावनरज दरसावै सोई

Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव

Verse 67 of 115

(राग जिला) वृदावनको जाना हेली वृदावन को जाना है। रसिक रँगीले राधामोहन तिनसों दिल लहिराना है॥ [1] ललितकिशोरी ने दृढकर अब येही मनमें ठाना है। ललितलता निधुवन के नीचे ह्वाँईं ठीक ठिकाना है॥ [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (288) (राग जिला) हेली को वृदावन जाने के लिए वृदावन जाना है। रसिक रंगाली राधामोहन तिनसन ने हृदय को झकझोर दिया है.. [1] ललित किशोरी ने देखा है और अब यह स्थान मेरे मन में है। ललितलता निधुवन की आल्हा ह्वानिन सही जगह है.. [2] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (288)
कालीदह कूल कुंजके माहींराधा नाम को आधार