राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 7 of 115
आन देश की इमरती, सुनितिहु मुख करुवाय।
वृंदावन की रज अजी, मिसिरिहु ते मिठियाय॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, वृंदावन शतक प्रथम (16)
मुझे इस देश पर गर्व है, मैं आपकी बात सुन रहा हूं।' वृन्दावन के राज अजी, मिसिरिहु ते मिठियाय.. - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, वृन्दावन शतक प्रथम (16)