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Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 75 of 115
(सवैया)
ऐसी कृपा कछु करो किशोरी, चरन कमल ही रहों लपटानी। [1]
नितविहार निरंतर पेखौं, सुनतहीं रहौं प्रिय पी मृदु बानी॥ [2]
तुरत-सचातुरी तहीं निरवारौं, कहुं पायल नूपुर उरझानी। [3]
‘ललित किशोरी' बसौं अखंडित, श्री वृन्दावन रज सुखदानी॥ [4]
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी
(सवैया) इतनी कृपा करो किशोरी, मुझे अपने चरण कमलों में रहने दो प्रिये। [1] मैं नित गाती रहूं, सुनती रहूं मधुर आवाज प्रिये.. [2] तुरत सच बताऊंगी, पायल नूपुर उर्जहानी बताऊंगी। [3] 'ललित किशोरी' बसौं अखण्डित, श्री वृन्दावन राज सुखदानी.. [4] - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी