राधा नाम को आधार
Abhilash Madhuri — श्री ललित किशोरी देव
Verse 84 of 115
ललित किशोरी आस रही मन, ब्रज रज तज कहीं अनत न जा।
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (६५)
ललित किशोरी अस रहि मन, ब्रज रज तज कहिन अनत जा ना। - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (65) अपने हृदय में ऐसी आशा रखो कि तुम ब्रज का राज्य छोड़कर कहीं नहीं जाओगे।